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झेंग ही: वह एडमिरल जो चीन को दुनिया तक ले गया

झेंग ही: वह एडमिरल जो चीन को दुनिया तक ले गया

गति

परिचय

सन् 1405 में, चीन के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में निचले यांग्त्ज़ी नदी के किनारों और फ़ुज़ियान प्रांत के तटों पर एक ऐसा नौसैनिक बेड़ा इकट्ठा हुआ, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था। इस बेड़े में ढाई सौ से भी ज़्यादा जहाज़ शामिल थे, जिनमें दर्जनों इतने विशाल जहाज़ थे कि उस दौर का पूरा यूरोपीय बेड़ा उनके माल-गोदामों में समा जाता। इस बेड़े की कमान एक लंबे-चौड़े, रौबदार मुसलमान खोजे अफसर Zheng He के हाथों में थी, और उनके साथ करीब 27,000 नाविक, सैनिक, दुभाषिए, वैद्य, खगोलशास्त्री और राजनयिक सवार थे। इस अभियान का मकसद यूरोपीय अर्थों में विजय प्राप्त करना नहीं था — न ज़मीन पर कब्ज़ा करना, न लोगों को गुलाम बनाना, न शोषण पर टिकी उपनिवेश स्थापित करना। बल्कि इसका उद्देश्य देखने में जितना सरल, मायने में उतना ही विराट था: नव-स्थापित मिंग राजवंश की शान-ओ-शौकत को दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्रों, हिंद महासागर, अरब के तटों और अंततः पूर्वी अफ्रीका के शहरों और बंदरगाहों तक पहुँचाना। अगले अट्ठाईस वर्षों में, Zheng He ने ऐसे सात समुद्री अभियानों की अगुवाई की — जावा से लेकर केन्या तक के बंदरगाहों पर जाकर विदेशी राजाओं से आधीनता स्वीकार करवाई, व्यापारिक रिश्ते कायम किए, और अपने बेड़े की अकल्पनीय विशालता से चीनी शाही व्यवस्था की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया।

अपने आखिरी अभियान में उनकी मृत्यु समुद्र में ही हुई — फारस की खाड़ी और पूर्वी अफ्रीकी तट से वापसी के दौरान, हिंद महासागर में कहीं। वे अपने पीछे न कोई उपनिवेश छोड़ गए, न कोई भू-साम्राज्य, न विदेशी धरती पर कोई स्थायी सैन्य ठिकाना। जो विरासत वे छोड़ गए, वह कहीं ज़्यादा अमूर्त थी — और फिर भी कहीं ज़्यादा टिकाऊ: दर्जनों देशों की स्मृतियों और दस्तावेज़ों में यह चेतना संरक्षित है कि चीन ने एक बार दुनिया की तरफ खुला हाथ बढ़ाया था, और दुनिया ने अजदहे के सिंहासन का नाम जाना था।

उनकी मृत्यु के बाद सदियों तक, Zheng He को चीन में ही काफी हद तक भुला दिया गया। कन्फ्यूशियस विचारधारा के अधिकारियों ने जानबूझकर उनके दस्तावेज़ नष्ट कर दिए, क्योंकि उनकी नज़र में समुद्री साहसिक अभियान फ़िज़ूलखर्ची थी — उचित शाही व्यवस्था की कृषि-आधारित नींव से ध्यान भटकाने वाली विलासिता। आधुनिक इतिहासकारों ने जब उन्हें फिर से खोजा, और जब चीनी जनवादी गणराज्य की सरकार ने उन्हें चीन की समुद्री विरासत के प्रमुख प्रतीक और — जैसा बीजिंग कहता है — समकालीन युग में चीन के शांतिपूर्ण उदय की मिसाल के रूप में स्थापित किया, तब वे पूर्व-आधुनिक दुनिया के सबसे चर्चित और सबसे महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में से एक बन गए। Zheng He कौन थे, उन्होंने समुद्र क्यों पार किया, क्या हासिल किया, और आखिर चीन ने समुद्र से मुँह क्यों मोड़ लिया — यह सब समझना वैश्विक इतिहास के उन महान मोड़ों में से एक को समझना है, जब सभ्यताओं की राहें अलग हो गईं और उस अलगाव ने आने वाली हर चीज़ को आकार दिया।

एक चौराहे पर जन्मी ज़िंदगी: युन्नान, इस्लाम और मंगोल विरासत

Zheng He का जन्म Ma He के नाम से, लगभग 1371 में, आज के दक्षिण-पश्चिमी चीन में स्थित युन्नान प्रांत में हुआ था। युन्नान एक असाधारण भौगोलिक और सांस्कृतिक जटिलता वाली भूमि है — अपूर्व जैव-विविधता से भरपूर एक ऊँचा पठार, जिसे गहरी नदी-घाटियाँ और कोहरे से ढकी पर्वत-श्रृंखलाएँ काटती हैं, और जो पश्चिम में आज के म्यांमार, दक्षिण में लाओस और दक्षिण-पूर्व में वियतनाम से सीमा साझा करती है। चौदहवीं सदी में यह प्रांत चीनी सांस्कृतिक और प्रशासनिक मुख्यधारा में पूरी तरह नहीं घुला-मिला था। मंगोल युआन राजवंश ने इसे एक सीमांत प्रांत के रूप में शासित किया था, और उससे पहले यह स्वतंत्र दाली राज्य था — अपनी राजवंशीय परंपराओं के साथ, बौद्ध और स्थानीय धार्मिक प्रथाओं के अपने अनूठे मिश्रण के साथ, और मध्य एशिया से आई एक बड़ी मुस्लिम आबादी के साथ, जो तेरहवीं सदी में यूरेशिया में फैली मंगोल विजय की लहरों के साथ यहाँ आई थी।

Ma He का परिवार हुई चीनी समुदाय से था — एक मुस्लिम जातीय समूह, जिसकी जड़ें चीन में कई सदियों पुरानी हैं। यह समुदाय उन अरब और फ़ारसी व्यापारियों, सैनिकों और प्रशासकों की विरासत से जुड़ा था, जो तांग और सॉन्ग राजवंशों के दौरान स्थलीय सिल्क रोड और दक्षिणी समुद्री व्यापार मार्गों के किनारे बस गए थे। मंगोल काल में इस समुदाय की संख्या में काफ़ी वृद्धि हुई, जब युआन साम्राज्य में प्रशासनिक पदों पर मध्य एशियाई मुसलमानों की सक्रिय रूप से भर्ती की जाने लगी। परिवार का उपनाम "Ma" दरअसल मुहम्मद का एक संक्षिप्त चीनी रूप था — हुई मुसलमानों में यह आम चलन था कि पैग़म्बर के नाम को एक ही एकाक्षरी चीनी अक्षर में लिख दिया जाता था। परिवार की वंशावली अपने समुदाय की दृष्टि से बड़ी प्रतिष्ठित थी: वे सय्यद अज्जल शम्स अल-दीन उमर के वंशज होने का दावा करते थे, जो एक बुखारी मुस्लिम प्रशासक और विद्वान थे और जिन्होंने तेरहवीं सदी में मंगोल युआन राजवंश के अधीन युन्नान के गवर्नर के रूप में सेवा की थी। वे स्वयं मध्य एशिया की इस्लामी विद्वत्ता और प्रशासनिक अभिजात वर्ग से, विशेष रूप से आज के उज़्बेकिस्तान के ख़्वारज़्म क्षेत्र से, थे।

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स्रोत: worldhistory.org, asianstudies.org, utc.edu, exploration.marinersmuseum.org, afe.easia.columbia.edu, newworldencyclopedia.org, newyork.china-consulate.gov.cn, aboutislam.net, education.maritime-museum.org, asiasociety.org, metmuseum.org, nationalgeographic.org, ehistory.osu.edu, gutenberg.org

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